अध्याय 157

जेम्स दरवाज़े पर खड़ा था। उसके सूट की जैकेट बाँह पर टंगी थी, टाई ढीली पड़ी थी और बाल बिखरे हुए थे।

उसका चेहरा बेहद खराब लग रहा था—आँखें लाल, जैसे रात भर जागा हो—और उसकी नज़र इंडिगो और मेरे बीच बार-बार घूम रही थी।

“सोफिया, दादी… तुम दोनों मुझे शुरू से झूठ बोलती रही हो।” वह भर्राई हुई आवाज़ में एक-ए...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें